काली खांसी ठीक करने के 10 घरेलू इलाज – Whooping Cough Home Remedies in Hindi

काली खांसी एक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है। यह बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella pertussis) नामक बैक्टीरिया के द्वारा होता है, जो सांस कि नालियों में संक्रमण फैलाता है।

काली खांसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में काफी तेजी से फैलती है। यह मुख्य रूप से बच्चों में होती है, लेकिन जवान और बुजुर्ग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

बैक्टीरिया से संक्रमित होने के लगभग 7 से 10 दिन बाद काली खांसी के शुरुआती लक्षण और संकेत दिखाई देना शुरू हो जाते हैं। शुरुआत में सामान्य जुकाम (common cold) की तरह ही लक्षण होते हैं, जैसे हल्की खांसी, छींक आना, नाक बंद होना, नाक बहना और हल्का बुखार होना।

यदि इन्फेक्शन का समयानुसार उपचार न किया जाए तो खांसी की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने लगती है और सांस लेते समय गले से तेज घरघराहट की आवाज आने लगती है। इसके साथ ही आपको उल्टियां भी हो सकती हैं।

6 महीने से कम उम्र के बच्चों में काली खांसी होने की सम्भावना काफी ज्यादा होती है। साथ ही, जिन वयस्कों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी पॉवर) काफी कम होती है उनको भी काली खांसी काफी आसानी से हो सकती है। 6 महीने से कम उम्र के बच्चों में यह इन्फेक्शन काफी खतरनाक होता है, इसलिए तुरंत उन्हें डॉक्टर के पास ले जायें।

काली खांसी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका होता है pertussis vaccine (काली खांसी टीकाकरण) करवाना। टीकाकरण की प्रक्रिया बचपन में ही शुरू हो जाती है, लेकिन वयस्क भी इसे करवा सकते हैं।

यदि आपको काली खांसी है तो डॉक्टर से उचित उपचार लेने के साथ-साथ आप कुछ घरेलू उपचारों को अपनाकर भी इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं और खांसी की आवृत्ति घटा सकते हैं।

नोट – यदि आपके बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है और अत्यधिक उल्टी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। काली खांसी होने पर डॉक्टर से उचित उपचार लेना ही सर्वप्रथम विकल्प होता है। यहां पर दिए गए उपचारों को आप सहायक विकल्प की तरह लें जो काली खांसी को जल्दी ठीक करने में मदद करेंगें।

1. अदरक (Ginger)

अदरक काफी प्रभावशाली कफ निस्सारक होता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं जो काली खांसी के बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती हैं। साथ ही, यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है जिससे इन्फेक्शन से लड़ने में और जल्दी स्वस्थ होने में मदद मिलती है।

  • दो-दो चम्मच ताजा अदरक का जूस और कच्चा शहद मिलाकर सेवन करें। कुछ दिनों के लिए इसका सेवन रोज दिन में दो बार करें।
  • या फिर, अदरक का जूस, नींबू का जूस और प्याज का जूस को बराबर मात्रा में मिलाएं। रोज दिन में 2-3 बार एक-एक चम्मच मात्रा में इसका सेवन करें।
  • या फिर, दो चम्मच मेथी के बीजों को दो कप पानी में तब तक उबालें जब तक कि यह आधा न हो जाये। अब इसमें एक चम्मच ताजा अदरक का जूस और थोड़ा सा शहद मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन रोज दिन में एक बार करें।

2. हल्दी (Turmeric)

हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल प्रॉपर्टीज होती हैं जो काली खांसी को ठीक करने में मदद करती हैं। खांसी के लक्षणों पर इसका चिकित्सकीय प्रभाव होता है, खासतौर पर शुष्क खांसी पर। साथ ही, इसकी इम्युनिटी-बूस्टिंग प्रॉपर्टीज इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती हैं।

  • एक चम्मच कच्चे शहद में आधा चम्मच हल्दी मिलायें। इसका सेवन रोज दिन में दो बार करें जब तक कि काली खांसी पूरी तरह से ठीक न हो जाये।
  • या फिर, एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन रोज दो बार करें।
  • या फिर, आप हल्दी के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। किसी भी मेडिकल स्टोर पर हल्दी के कैप्सूल आसानी से उपलब्ध होते हैं। इसके उचित डोज जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

3. लहसुन (Garlic)

काली खांसी में लहसुन नेचुरल एंटीबायोटिक की तरह काम करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल प्रॉपर्टीज होती हैं जो पर्टुसिस इन्फेक्शन को साफ करने में काफी मदद करती हैं।

  • रोज दिन में 2 या 3 बार एक चम्मच ताजा लहसुन के जूस का सेवन करें।
  • साथ ही, एक पानी के बर्तन में एक चम्मच कटी हुई लहसुन की कलियों को डालकर उबालें। अब अपने सिर को टॉवल से ढक लें और इसकी वाष्प को लम्बी-लम्बी सांसों से अन्दर लें। इस उपचार को छोटे बच्चे न करें।
  • या फिर, आप रोज दो चम्मच लहसुन के सिरप का भी सेवन कर सकते हैं। यदि मरीज छोटा बच्चा है तो उसको एक चम्मच लहसुन के सिरप का सेवन करायें। सिरप बनाने के लिए, दो-दो कप पानी और सेब का सिरका और 500 ग्राम पिसे हुए लहसुन को आपस में मिलाएं। अब इसे कांच के गिलास में भरकर 4-5 घंटे के लिए रख दें। अब इस मिश्रण को छलनी से छान लें और आधा कप कच्चा शहद मिलाकर सेवन करें।

4. शहद (Honey)

शहद में शक्तिशाली एंटी-सेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल और हीलिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो काली खांसी के बैक्टीरिया को मारने में मदद करती हैं और लक्षणों को ठीक करती हैं।

  • एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच कच्चा शहद मिलाकर धीरे-धीरे सेवन करें। इसका सेवन दिन में दो-तीन बार करें। गले पर इसका पीड़ा नाशक प्रभाव होता है।
  • रात को सोने से पहले एक चम्मच कच्चे शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर सेवन करें। इससे आपको अच्छी नींद आयेगी
  • या फिर, एक-एक चम्मच कच्चे शहद और मूली के रस को मिलाएं। अब इसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन रोज तीन बार करें।

5. अजवायन की पत्ती (Oregano)

श्वासप्रणाली में संक्रमण (रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन) जैसे काली खांसी की समस्याओं में अजवायन की पत्तियां काफी लाभकारी होती हैं। इसमें antispasmodic, antibacterial और expectorant गुण होते हैं जो फेफड़ों से बलगम साफ करने में मदद करते हैं और काली खांसी को ठीक करते हैं।

  • एक पानी के बर्तन में 5-6 बूंदें अजवायन की पत्तियों के तेल की डालकर उबालें। अब अपने सिर पर टॉवल ढककर इस बर्तन के ऊपर रखें और वाष्प को लम्बी-लम्बी सांसों से अन्दर लें।
  • या फिर, चार चम्मच जैतून के तेल में 10 से 15 बूंदें अजवायन की पत्तियों के तेल की डालें। अब रोज रात को सोने से पहले इस मिश्रण से अपनी छाती की मालिश करें। इससे खांसी को कम करने में मदद मिलेगी।
  • आप रोज दिन में दो-तीन बार अजवायन की पत्तियों से बनी चाय का भी सेवन कर सकते हैं।

6. नींबू (Lemon)

काली खांसी को प्राकृतिक रूप से ठीक करने के लिए नींबू भी काफी फायदेमंद होता है। नींबू में साइट्रिक एसिड होती है जो बलगम को पतला करती है। साथ ही, इसमें शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल प्रॉपर्टीज होती हैं जो इन्फेक्शन से लड़ती हैं। इसमें विटामिन सी भी पाया जाता है जो शरीर की रोग प्रतोरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

  • एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच ताजा नींबू का रस और थोड़ा सा कच्चा शहद मिलाएं। रोज इसको तीन-चार बार सेवन करें।
  • या फिर, एक आधे कटे नींबू में थोड़ा सा नमक और काली मिर्च छिड़कें। अब इसे धीरे-धीरे चूसें। इससे आपके इन्फेक्टेड गले में काफी राहत मिलेगी।

7. मुलेठी (Licorice)

मुलेठी एक demulcent (शांतिदायक) की तरह काम करती है, मतलब यह गले में mucilage की पतली परत बना देती है, जिससे लगातार हो रही खांसी में राहत मिलती है। साथ ही, यह फेफड़ों और ब्रोन्कियल ट्यूब से congestion (जमाव) साफ करने में मदद करती है।

  • दो कप पानी में एक चम्मच मुलेठी की जड़ के पाउडर को डालकर 5 मिनट के लिए उबालें। अब 10 मिनट के लिए इसे ठंडा होने दें और फिर छानकर सेवन करें। इसका सेवन रोज एक बार करें।
  • या फिर, रोज दिन में तीन बार आधा चम्मच मुलेठी के पाउडर में थोड़ा सा शहद मिलाकर सेवन करें।

8. बादाम (Almonds)

बादाम और बादाम का तेल, दोनों ही काली खांसी के उपचार में फायदेमंद होता है। बादाम में अत्यधिक मात्रा में फाइटोकेमिकल्स (phytochemicals) और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो काली खांसी के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। इसमें इम्युनिटी-बूस्टिंग प्रॉपर्टीज भी होती हैं।

  • 10-10 बूंदें प्याज के रस और अदरक के रस में 5 बूंदें बादाम के तेल की मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन रोज दिन में तीन बार करें।
  • या फिर, 5-7 बादामों को पानी में डुबोकर रातभर के लिए रख दें। सुबह इनको छीलकर पीस लें और बारीक पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में एक चम्मच मक्खन मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन रोज दिन में तीन बार करें।
  • साथ ही, दो चम्मच बादाम के तेल में 4-5 बूंदें रोजमेरी के तेल की मिलाकर, सीने की मालिश करें।

9. कैमोमाइल टी (Chamomile Tea)

कैमोमाइल टी का नियमित सेवन करने से भी काली खांसी के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। इस हर्ब में सूथिंग, एंटी-इन्फ्लामेट्री और इम्युनिटी-बूस्टिंग प्रॉपर्टीज होती हैं जो लक्षणों को कम करती हैं और जल्दी ठीक होने में मदद करती हैं।

  • कैमोमाइल फ्लावर के सूखे पत्तों को एक कप पानी में डालकर उबालें।
  • अब इसे 5 मिनट के लिए ठंडा होने दें और फिर छान लें और थोडा सा नींबू का रस और शहद मिलाकर पी लें।
  • इसका सेवन रोज दिन में 3 या 4 बार करें।

10. केसर (Saffron)

आयुर्वेद के अनुसार काली खांसी में केसर अत्यधिक फायदेमंद होता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं जो खांसी के इन्फेक्शन को फैलाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती हैं। साथ ही, एक कफ निस्सारक (expectorant) होने के कारण केसर कफ को साफ करने में भी मदद करता है जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

  • 6 केसर के स्टिग्मा को आधा कप पानी में घोलें।
  • इसका सेवन दिन में 3-4 बार करें।

अतिरिक्त टिप्स

  • रोज 1 से 2 गिलास अंगूर के जूस का सेवन करें। इससे हीलिंग प्रोसेस तेज होगी।
  • दो चम्मच कच्चे और बिना छने हुए सेब के सिरका को एक कप पानी में मिलाएं। अब इसमें थोडा शहद मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन दिन में 2-3 बार करें।
  • अधिक ठंडे और नमी वाले वातावरण से दूर रहें क्यूंकि इससे कंडीशन और ज्यादा बिगड़ सकती है।
  • तेज रिकवरी के खूब रेस्ट करें।
  • तरल पदार्थों जैसे पानी, जूस, सूप आदि का खूब सेवन करें। इससे आप डिहाइड्रेशन से बचे रहेंगे।
  • खांसते समय अपने मुंह ढक लें और अपने हांथों को साफ करें।
  • घर से बाहर निकलने से पहले अपने मुंह में मास्क पहनें।
  • अपने भोजन में विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इससे खांसी की अवधि में कमी आयेगी।

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